8 मई 2019 - 14:07
जेसीपीओए पर ईरान का फैसला, युरोप की प्रतिक्रिया, बिना खर्च के समझौता बचाए रखने की आशा!

जूलाई 2015 में वियना में ईरान और गुट पांच धन एक के मध्य एतिहासिक परमाणु समझौता हुआ जिसे जनवरी सन 2016 से लागू कर दिया गया किंतु 8 मई सन 2018 को अमरीका इस समझौते से बाहर हो गया जिसके बाद ईरान को आशा थी कि बचे हुए सदस्य इस समझौते को बचाने के लिए कुछ करेंगे किंतु उन्होंने ढेर सारे वादों के अलावा कुछ नहीं किया।

जेसीपीओए के बारे में अमरीकी फैसले और युरोप की रक्षात्मक मुद्रा के बाद ईरान की उच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने संवर्धित यूनियन और भारी पानी की बिक्री को 60 दिनों तक रोक देने का फैसला किया है और यह कहा है कि अगर युरोप ने साठ दिनों के भीतर क्षतिपूर्ति कर दी तो ईरान वापसी करेगा अन्यथा, दूसरे क़दम उठाए जाएंगे। ईरान के इस क़दम के बाद फ्रांस के रक्षा मंत्री ने कहा है कि पेरिस , ईरान के साथ परमाणु समझौते के बाक़ी रहने का इच्छुक है और फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी इस समझौते को बचाए रखने का भरपूर प्रयास कर  रहे हैं। इस प्रकार के दावों के विपरीत हक़ीक़त यह है कि युरोप ने पिछले एक वर्ष के दौरान, वादों के अलावा कुछ नहीं किया और ईरान इन वादों से आशा लगाए, एक साल तक अमरीका के प्रतिबंधों का तमाशा देखता रहा। यह निश्चित है कि इस प्रकार की स्थिति के जारी रहने से ईरान का कोई भला नहीं होने वाला तो फिर क्यों ईरान इस स्थिति को जारी रखे? इस समय फैसला, गुट चार धन एक के पास है यदि सच में वह परमाणु समझौते की सुरक्षा चाहते हैं तो उन्हें ईरान को दिये गये वादों का पालन करना होगा अन्यथा ईरान का अगला क़दम बेहद ठोस और निर्णायक होगा।